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लोग हमसे मिल के क्या ले जायेंगे?
सिर्फ़ जीने के अदा ले ले जाएँगे
दो घड़ी बैठेंगे तेरे पास हम
और बातो का मजा ले जाएँगे ।
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सारे बदन का खून पसीने मे जल गया
इतना चले के जिस्म हमारा पिघल गया
अच्छा हुआ जो राह मे ठोकर लगी हमे
हम गिर पड़े तो सारा ज़माना संभल गया ।
दहशत मे कोई साथ हमारा ना दे सका
दामन की फिक्र की तो गिरेबां निकल गया
चलते थे गिन रहे थे मुसीबत के रात दिन
दम लेने हम जो बैठ गए दम निकल गया। |
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